Hindi Urdu Poet & Journalist engaged in writing historical project in Islamic History to write LONGEST HAMD/SUFI SONG in HINDI of 10000 verses. Based on the teaching and inspiration of Quran this project will be completed in 2015-Till today total 3600 verses are completed.with the completion of 6 volume. Work on 7th volume is on progress. Allah (SWT) blessed him words while reading Sure Hashra.
सोमवार, 1 अगस्त 2011
गुरुवार, 9 जून 2011
ABDE MUHMMAD KABEER
अब्दे मुहम्मद कबीर
मुहम्मद (SAW) का बढ़ा ग़ुलाम
मुहम्मद (SAW) का बढ़ा ग़ुलाम
ए मेरे रहबर ए रसूले खुदा .
ए मेरे प्यारे नबी ए मुहम्मद मुस्तफा .
ए मेरे प्यारे नबी ए मुहम्मद मुस्तफा .
में हु ताबेदार तेरा
हां ! में हु तेरा गुलाम
अस्सलाम अस्सलाम
हां ! में हु तेरा गुलाम
अस्सलाम अस्सलाम
अब्दे मुहम्मद कबीर ,
उसने ही पुकारा मुझे .
इस तरह बख्श दिया ,
तेरा सहारा मुझे
उसने ही पुकारा मुझे .
इस तरह बख्श दिया ,
तेरा सहारा मुझे
.
पूरी करदी यूँ उसने ,
मेरी हाजत तमाम .
अस्सलाम अस्सलाम
मेरी हाजत तमाम .
अस्सलाम अस्सलाम
सच है ए प्यारे नबी ,
वो ही जाने ग़ैब की बात ,
ख्वाब में उसने ही बख्शी ,
तेरे पीछे चलने की सौगात
वो ही जाने ग़ैब की बात ,
ख्वाब में उसने ही बख्शी ,
तेरे पीछे चलने की सौगात
.
शान से कह दिया मुझे ,
उसने मुहम्मद का गुलाम .
अस्सलाम अस्सलाम
उसने मुहम्मद का गुलाम .
अस्सलाम अस्सलाम
तस्बीह में करता हु उसकी ,
ए नबी रात और दिन .
ख्वाब में कह दिया उसने ,
मुझे महबूबे हषर अलीमुद्दीन
ए नबी रात और दिन .
ख्वाब में कह दिया उसने ,
मुझे महबूबे हषर अलीमुद्दीन
.
बस तू ही तो जनता है ,
उसकी मर्ज़ी उसका काम .
अस्सलाम अस्सलाम
उसकी मर्ज़ी उसका काम .
अस्सलाम अस्सलाम
ए मुहम्मद तू भी दे दे ,
मुझको तोहफा एक नायाब .
झोली में खाली लेकर ,
आया हु तेरे जनाब
मुझको तोहफा एक नायाब .
झोली में खाली लेकर ,
आया हु तेरे जनाब
.
तू ही बता दे ए मुहम्मद ,
मेरे ख्वाबो का अंजाम .
अस्सलाम अस्सलाम
मेरे ख्वाबो का अंजाम .
अस्सलाम अस्सलाम
नूर उसका देखा मेने ,
सब्ज़ तेरा साया देखा .
कर्बला वाले को भी ,
मेने तनहा बेठा देखा .
सब्ज़ तेरा साया देखा .
कर्बला वाले को भी ,
मेने तनहा बेठा देखा .
छाये है इस क़दर मुझ पर ,
अल्लाह के निन्यानवे नाम .
अस्सलाम अस्सलाम
अल्लाह के निन्यानवे नाम .
अस्सलाम अस्सलाम
ए मुहम्मद ज़रा बता दे ,
कौन है युसूफ यहाँ .
ख्वाब का उससे बेहतर ,
कौन है मतलब समझा
कौन है युसूफ यहाँ .
ख्वाब का उससे बेहतर ,
कौन है मतलब समझा
.
ए मुहम्मद तू ही बता दे ,
ज़मीन पर युसूफ सा नाम .
अस्सलाम अस्सलाम
ज़मीन पर युसूफ सा नाम .
अस्सलाम अस्सलाम
मेरे इन ख्वाबो की ताबीर ,
ए मोहम्मद रब ही जाने .
तू तो सब कुछ जानता है ,
कोई जाने या न जाने
ए मोहम्मद रब ही जाने .
तू तो सब कुछ जानता है ,
कोई जाने या न जाने
.
प्यारे नबी तू ही बता दे ,
दर पे है तेरे गुलाम .
अस्सलाम अस्सलाम
दर पे है तेरे गुलाम .
अस्सलाम अस्सलाम
.
वारिज्वानुम मिनल्लाहे अकबर ,
अल्लाह की मर्जी को सलाम .
ताक़याम्त लेता रहू में ,
अल्लाह अल्लाह अल्लाह नाम
अल्लाह की मर्जी को सलाम .
ताक़याम्त लेता रहू में ,
अल्लाह अल्लाह अल्लाह नाम
.
नात लिखना हो मुक़द्दर ,
हम्दो सना हो मेरा काम .
अस्सलाम अस्सलाम
हम्दो सना हो मेरा काम .
अस्सलाम अस्सलाम
पाया है तुने मुहम्मद ,
जो फ़रिश्ते से पैघाम .
ख्वाबो में आती है मेरे ,
वो ही आयातें तमाम
जो फ़रिश्ते से पैघाम .
ख्वाबो में आती है मेरे ,
वो ही आयातें तमाम
.
पाया है हमने तुझसे ही ,
बारी-ताला का पयाम .
अस्सलाम अस्सलाम
बारी-ताला का पयाम .
अस्सलाम अस्सलाम
अल्लाह से दुआ करें की इस ज़माने में मेरे खवाबो की ताबीर बतानेवाला अल्लाह का कोई नेक बन्दा मिल जाये और हम राहे खुदा पर उसके रसूल के ताबेदार बन्दे अपना सब कुछ न्योछावर करदे- आमीन
रविवार, 5 जून 2011
JANNAT KI HAWA
जन्नत की हवा
मेरा दर्द समझ सके जो , मुझे वो मसीहा दे दे .
मुझको मेरे इलाही , तू वो मुश्किलकुशा दे दे .
मेरे दिल में क्या छुपा है , सब जानता है फिर क्यु ?
चुपचाप यू तमाशा , तू देख रहा दे दे .
न जाने तलाश मेरी , कब कैसे पूरी होगी .
मंजिल तलक में पहुंचू , वो राह ज़रा दे दे .
जुम्बिश नहीं हाथो में , है जिस्म भी शकिश्ता.
नज़रे थकी हुई है , अब तो आसरा तेरा दे दे .
टूटी हुई है लाठी , पहुंचूंगा तुझ तक कैसे ?
इतना नसीब में तू , चलना तो ज़रा दे दे .
देता है छप्पर फाड़कर , में ने सुना है सब से .
टूटी हुई चाट है मेरी , पहले साया तो ज़रा दे दे ,
रूदाद मेरी सुनता कोई नहीं जहां में ,
ऐसा कोई एक बंदा , तेरा तो यहाँ दे दे .
अब तेरे सिवा किसी पर , भरोसा नहीं है मेरा .
अब थाम ले मुझे तू , सहारा तो ज़रा दे दे .
जंगल में , बयाबां में , मजधार में , तुफा में .
दर दर की ठोकरों का , अब तो तू सिला दे दे .
तेरे सिवा यहाँ पर , कोई दूजा खुदा नहीं है .
तुझ पर ही अकीदा है , मेरा ए खुदा दे दे .
जाने कब सुनेगा , आरिफ की दुआ अल्लाह .
ज्यादा नहीं थोड़ी सी , तेरी जन्नत की हवा दे दे .
पंडित मुस्तफा आरिफ
मंगलवार, 31 मई 2011
THAK HAAR KAR ILLAHI !!!
थक हार कर इलाही !!!
क्या क्या बताऊँ सबको , तेरे बारे में खुदां में .
कुरान से खोल पाया , सब दिल की खिडकीया में .
कोई दर्द मेरा सुनले , तेरे सिवा इलाही ,
लगता नहीं बना है , ऐसा कोई जहाँ में .
हर दर हर एक चौखट पर , रुसवा हुआ में जब तो ,
थक हार कर फिर से , तेरे दर पे आ गया में .
बिगड़ी कोई बना दे , ये आरजू लिए में ,
भटका मेरे इलाही , न जाने कहा कहा में .
हर शख्श ने पुकारा , मेरा पास चल के आ जा ,
हां ! एडिया रगड़ते , वहां तक पहुँच गया में .
हर शख्श ने पुकारा , बस में ही हु मसीहा ,
मुश्किलकुषा भी में हु , माबूद में खुदा में .
तौबा कुबूल करना , लेकिन ये बात सच है ,
मजबुरिया मिलाती है , शेतान से इंसान को दुनिया में .
फिर रौशनी अता की , मेरी ज़िन्दगी में तू ने ,
शिद्दत से कुरान का , हर लफ्ज़ पढ़ गया में .
फिर तुने ही हिदायत , मुझे सब्र की अता की ,
फिर राह पर ही तेरी , सारी उमर चला में .
अब तो यही है ख्वाहिश , तेरे दर पे जब भी आऊं,
पा जाऊं तुझसे तेरे , बस रहम का दरया में .
पंडित मुस्तफा आरिफ , देलहि
बुधवार, 25 मई 2011
MAHIMA PAISE KI
महीमा पैसे की
पैसा नचा रहा है यू इंसान को उँगलियों में .
मदारी नचाये बन्दर ज्यु शहर की गलियों में .
शोहरत उगा रहा है गमलो में क्यारियों में .
पैसा ही छा रहा है हर सिम्त वादियों में .
अल्लाह को भूल दुनिया पैसे की है पुजारिन ,
पैसे ने रख दिया है खुद उसको हाशियों में .
तहज़ीब भूल बेठे पैसे के बल पर बच्चे ,
जीना सीखा रहे हैं बुजुर्गो को बस्तियों में .
रुदाद कोई किसी की सुनता नहीं यहाँ पर ,
बहर है कानो पर अँधियारा है अंखियों में .
बस एक तेरे दर पर नज़रें लगी हुई है ,
मायूस नहीं होता कोई तेरी वादियों में .
कचरा जलाएगा तू जिस दिन मेरे इलाही ,
रख लेना मुझे चुनकर तू अपने मोतियों में .
सब्रो -करार -नसीहत है मुफलिसों की दोलत ,
पैसे के ही पुजारी शामिल है हस्तियों में .
अब तो सरस्वती भी लक्ष्मी की है पुजारिन
रख दी है वीणा उसने उसकी तिजोरियों में.
लक्ष्मी खरीदती है इल्मो हुनर अब खुद ही,
जकड़ा है आलिमों को उसने भी बेड़ियों में.
पैसे के बगेर किसीको कुछ सूझता नहीं है ,
पैसे का ही चलन है पंडितो मौलवियों में .
में हु यहाँ परेशां पैसे की ही वजह से ,
रोजाना हारता हु दुनिया से में रुपयों में .
सब कहते है दम है शब्दों में तेरे आरिफ ,
उड़ जायेंगे लेकिन ये पैसे की आंधियों में .
पंडित मुस्तफा आरिफ
रविवार, 1 मई 2011
SHUKRA HAI ALLAH KA
शुक्र है अल्लाह का
कर रहा शुक्रिया तेरा ये मुस्तफा .
बख्श दी तुने जिसे तेरी हम्दो -सना .
मुझ पे अल्लाह तेरा खूब एहसान है .
याद रखु तेरे जो भी फरमान है ,
सबके दिल में बसाऊ जो कुरान हँi.
जाकर उनको पदाऊ जो नादाँ है .
मेरे अल्लाह मुझे इसके काबिल बना .
कर रहा शुक्रिया तेरा ये मुस्तफा .
जिस तरह दूर रखा मुझे कुफ्र से .
जोड़े रखा मुझे तुने गोरो -फिक्र से .
ये सही है बचाया तुने ही शिर्क से .
जोडू में सबको वैसे ही तेरे ज़िक्र से .
दे दे मुझको हिदायत तू बे -इन्तहा .
कर रहा शुक्रिया तेरा ये मुस्तफा .
था अँधेरा बहुत रौशनी थी नहीं .
जी रहा था मगर ज़िन्दगी थी नहीं .
मेरे पेरो के नीचे ज़मी थी नहीं .
सजदा करता में वैसी ज़बी थी नहीं .
ऐसे में तूने कुरान अता कर दिया .
कर रहा शुक्रिया तेरा ये मुस्तफा .
तेरे कुरान ने ही आँख खोली मेरी ,
आखिर तुने ही भरी खली झोली मेरी .
एक दिन बोलेगी दुनिया भी बोली मेरी .
बड जाएगी जब मुमिनो की टोली मेरी .
मेरे जैसा ही हर शख्श होगा यहाँ .
कर रहा शुक्रिया तेरा ये मुस्तफा .
जानता हु की छोटा सा तिनका हु में .
तेरी खल्कात में भी सबसे नन्हा हु में .
बस इधर से उधर उड़ता रहता हु में .
जोर तुझसे ही पाकर के चलता हु में .
में हु कुछ भी नहीं सब करम है तेरा .
कर रहा शुक्रिया तेरा ये मुस्तफा .
शुक्रवार, 25 जून 2010
BAS TERE HI SAHARE
बस तेरे ही सहारे !!!
हमने ख्वाबो में बनाया था घरोंदा अपना .
तोड़ डाला आखिर तुने तो भरोसा अपना .
लौट कर हमको जब तेरे ही पास आना था ,
तुने हमको बनाया क्यों खिलौना अपना
पुतिल्या तेरी डोर तेरी नाच भी तेरा ,
क्यों दिखता है सबको यु तमाशा अपना .
जो मुक़द्दर में लिखा है मिलना नहीं है उसके सिवा ,
तुने पहले से ही जो लिख रखा है खाता अपना .
हमतो दरवेश है तू बादशाह है सबसे बड़ा ,
देदे हमको भी पनाह ज़रा फैलाले अहाता अपना .
हमतो ज़र्रे है तू है काएनात का मालिक ,
खाली होगा जब मकाँ तो मांगेगा किराया अपना .
आरिफ जाओ सुपुर्द करदो अपना सब कुछ उसके हाथ ,
वो मुहाफ़िज़ है बचा ले जायेगा शीशा अपना
सोमवार, 17 मई 2010
baat bahut chotee se
बात बहुत छोटी सी
बहुत बख्शा है ज़िन्दगी में हमें,
कुछ तो उसके लिए जमा कीजे.
ज़िक्रे अल्लाह में ज़िन्दगी बीते,
आप मेरे लिए दुआ कीजे .
उसकी तस्बीह के तरीके है हज़ार,
सिर्फ अल्ल्लाह अल्लाह नहीं किया कीजे.
नेक आमालों का वो आशिक है,
दिल से फरमानों पर चला कीजे.
गर उससे लो लगनी है तुम्हे ,
सिर्फ पाकीज़ा ही रहा कीजे.
उसने बख्शी है नमाज़ की दौलत,
आप पाबन्दी से अदा कीजे.
ये जो दुनिया है एक कसोटी है,
इस पर कुछ इस तरह चला कीजे.
तुम मोहम्मद के हमक़दम होकर,
बात कुरान की सुना कीजे.
परखे जाओ जो रोज़े महशर तुम,
खरे उतरों यही दुआ कीजे.
मेरा अल्लाह जिसमें राजी हो,
ऐसा जीने का सिलसिला कीजे.
हम्दो सना मेरी कुबूल हो जाए,
हाथ उठाकर ये इल्तिजा कीजे.
हम गुनाहगार तू बड़ा बख्शने वाला,
आजीजी से यही कहा कीजे.
बात आरिफ की छोटी छोटी सी,
तुम बड़े गोर से सुना कीजे.
इस में सब मसलहत है पोशीदा,
हरगिज़ इसको न अनसुना कीजे.
बुधवार, 7 अप्रैल 2010
Quran se prerna
वारीजवानुम मिनल्लाहे अकबर .
अपने दिल पर लगालो ये मुहर.
सबसे बड़ी नियामत है मुमिनो,
अल्लाह की मर्जी ही हम पर.
+++
हम आदमी को जानते है चेहरों के मुताबिक.
इज्ज़त भी बख्शते हैं हम ओहदों के मुताबिक.
अल्लाह से बड़ा तो कोई नहीं होता,
यही सच है कुरान की आयातों के मुताबिक.
+++
जोहर का वक़्त है नमाज़ अदा करनी है.
फिर उसकी तरफ हमको निगाह करनी है.
जुमा का दिन है दुआ तो कुबूल होगी ही,
उसके करम की भी वह वाह वाह करनी है..
सोमवार, 29 मार्च 2010
चार पंक्ति विचार

चार पंक्ति विचार
वो मेरा खैर ख्वाह है; उसका हबीब में।
फिर भी ये कह रहे हो की हूँ ग़रीब में।
कुछ बात है की आंसू मेरे सूखते नहीं है,
दरिया अता किया है जो उसने नसीब में।
लेकिन वो हाथ से भी तो बाहर नहीं होती।
पैरों को बांध रखा हैं उसने भी हदों में,
सबके नसीब में तो चादर नहीं होती।
तुफानो में दीपक का जलना, बड़ा मुश्किल होता हैं।
उसके अपने ही जब उसकी लाठी तोड़ दें,
उसका गिरना फिर संभालना, बड़ा मुश्किल होता हैं।
रविवार, 7 फ़रवरी 2010
मेरी दुआ " मादरे - वतन के नाम"

मेरी दुआ " मादरे - वतन के नाम "
ये दुआ है मेरी , ये दुआ है मेरी
सुन दुआएं मेरी , तू दुआएं मेरी ।
राह चाहे तू कितनी भी मुश्किल बना,
पा सकूँ में तुझे वो ही मंजिल बना,
मेरी दुनिया का बस एक हासिल बना,
तू मुझे तेरी खिदमत के काबिल बना।
है भरोसा तू बिगड़ी बनाएं मेरी।
ये दुआ है मेरी, ये दुआ है मेरी।
जिस ज़मी पर तुझे रोज़ सजदा करूँ,
मरते दम तक उसी की में सेवा करूँ,
गोद में जिसके ताउम्र खेला करूँ ,
माँ का रुतबा उसी को में बख्शा करूँ।
लेती है रात दिन जो बलाएँ मेरी।
ये दुआ है मेरी, ये दुआ है मेरी।
बद नज़र उसकी जानिब में उठने न दूँ,
एक भी उसके दुश्मन को बचने न दूँ,
आस्स्तिनो के सांपो को डसने न दूँ,
रोकलू उसपे ओले बरसने न दूँ।
करदे मज़बूत इतनी भुजाएं मेरी।
ये दुआ है मेरी, ये दुआ है मेरी।
हो उजाला मेरी राह में ए खुदा,
इल्म का नूर पाऊं यही है दुआ,
तेरे फरमानों से पाकर में होंसला,
खुद भी मेह्कुं, बने ये ज़मी खुशनुमा।
याद रखे ज़माना अदाएं मेरी।
ये दुआ है मेरी, ये दुआ है मेरी।
इस ज़मी पर जितने भी मोहताज है,
कोई सुनता नहीं जिनकी आवाज़ है,
हर घड़ी मुश्किलों की पड़े गाज है,
जानता हूँ तेरे हाथो में लाज हैं।
कर करम उनपे सुनके सदाएं मेरी।
ये दुआ है मेरी, ये दुआ है मेरी।
मुख्तलिफ भेष हैं, मुख्तलिफ हैं जुबा,
मुख्तलिफ हैं मज़हब, मुखतलिफ बस्तियां।
एक तहज़ीब हैं, एक है सबकी माँ।
सोन चिड़िया है यें जानता है जहाँ।
जिस्मो जाँ इसके ही काम आयें मेरी।
ये दुआ है मेरी, ये दुआ है मेरी।
झोली फैला के दर पर खड़ा मुस्तफा ,
कर दे पूरी मुरादें तू सुनले सदा,
तेरे कुरान से जो भी कुछ है सुना,
मेरे अल्लाह बनादें वही मेरी राह।
दायें बायें नज़र जा न पाएं मेरी।
ये दुआ है मेरी, ये दुआ है मेरी।
बुधवार, 30 दिसंबर 2009
सुन मेरी इल्तेजा !
सुन मेरी इतेजा !
कामयाबी की कोई राह दिखला तो दे
शुक्रिया करने का एक मौक़ा तो दे ।
में जो फिरता रहा हूँ यहाँ दर बदर
कोई सुनता नहीं
मुझको ज्यादा नहीं सिर्फ थोडा तो दे
शुक्रिया करने का एक मौका तो दे ।
तू है खालिक तेरे सब पर एहसान है
ये सुना है की तू बड़ा मेहरबान है
समंदर न सही एक कतरा तो दे
शुक्रिया करने का एक मौका तो दे ।
तेरे जाहो जलाली तो मशहूर है
तेरी रहमत बता हम से क्यों दूर हैं
गर खता है कोई तू आइना तो दे
शुक्रिया करने का एक मौका तो दे ।
ज़िन्दगी हो गयी करते करते दुआ
बीता बचपन जवानी अब में बुदा हुआ
शुक्रिया करने का एक मौका तो दे ।
ये सही है तेरे हाथो में दौर है
तेरी अंगुली पें नाचे हम तो वो मोर है
चल सके हम ज़रा इतना धागा तो दे
शुक्रिया करने का एक मौका तो दे ।
है यहाँ पर अँधेरा एक शमा भी नहीं
तेरे सूरज तक मेरा पहुचना भी नहीं
तितिमता दिया एक नन्हा तो दे
शुक्रिया करने का एक मौका तो दे ।
है ये दरिया तेरा तेरी ही नाउ है
ये ज़मी है तेरी तेरी ही छाव है
दे कही भी मगर तू आसरा तो दे
शुक्रिया करने का एक मौका तो दे ।
तू ज़माने को देता है किलकारियां
तेरी राह पर चले उनको दुश्वारियां
राज इतना सा आरिफ को समझा तो दे
शुक्रिया करने का एक मौका तो दे ।
दे रहा हु सदा सुन मेरी इल्तेजा
तू ने इंसा बनाया तेरा शुक्रिया
मेरे हाथो में भी एक झंडा तो दे
शुक्रिया करने का एक मौका तो दे ।
सोमवार, 28 दिसंबर 2009
बेगुनाह हुसैन
बेगुनाह हुसैन
अकबर अज़ान देंगे , सुबह आशुरा की आई ।
आई अज़ान आई , आई अज़ान आई ।
सूरज निकल गया है,
दिन भी नया नया है,
आशूर का बयां है,
अल्लाह का शुक्रिया है।
मेरी कलम को बख्सी, उसने जो रोशनाई।
आई अज़ान आई , आई अज़ान आई ।
मैदाने कर्बला है,
खैमा लगा हुआ है,
कुम्बा यहाँ जमा है,
अल्लाह का आसरा है।
जेहरा के लाल को, नाना की याद आई।
आई अज़ान आई , आई अज़ान आई ।
पाकीज़ा सरज़मी है,
अल्लाह की हाजरी है,
शिकवा कोई नहीं है,
हर चेहरे पर खुशी है।
मंज़र कभी फिर ऐसा, देखोगे नहीं भाई।
आई अज़ान आई , आई अज़ान आई ।
इस्लाम का है परचम,
है सब में पूरा दम ख़म,
सबरो रजा भी बाहम,
देखेगा सारा आलम।
क्या क्या नसीब लेकर, देखे ये घड़ी आई।
आई अज़ान आई , आई अज़ान आई ।
प्यारे नबी के प्यारे,
जेहरा के भी दुलारे,
हैदर अली के तारे,
हाँ हाँ हुसैन हमारे।
आज हम हुसैन की भी, देखेंगे करिश्माई।
आई अज़ान आई , आई अज़ान आई ।
अकबर की वो जवानी,
मासूम की कहानी,
जैनब की वो बयानी,
वो बूंद बूंद पानी।
आँखों से टपकता है, जब आती है रुलाई।
आई अज़ान आई , आई अज़ान आई ।
उठो औ अज़दारो,
मातम के तरफ दारो,
अल्लाह के वफादारों,
इस जौर से पुकारो।
वो आसमा भी सोचे, कैसी ये सदा आई।
आई अज़ान आई , आई अज़ान आई ।
जब होती है विलादत,
बढती है दिल में चाहत,
पाकर नायाब दौलत,
मिलती है हमको राहत।
खुश होते यहाँ मरकर, सब बच्चे बूड़े भाई।
आई अज़ान आई , आई अज़ान आई ।
प्यारी इन्हें शहादत,
अल्लाह से है मोहब्बत,
पाने के लिए जन्नत,
अब मोल लेंगे आफत।
दांतों तले है अंगुली, देखी जो चतुराई।
आई अज़ान आई , आई अज़ान आई ।
मर कर अमर रंहेंगे,
सारे कहर सहेंगे,
चुपचाप ही रहेंगे,
मुंह से न कुछ कहेंगे।
अल्लाह की मर्जी इनको, कैसी है रास आई।
आई अज़ान आई , आई अज़ान आई ।
प्यासे लबो को पानी मिलने के नहीं इम्काँ,
यहाँ प्यासे ही रहेंगे ये तीन दिन के महमा,
ऐसा नहीं यहाँ पर कोई नहीं है दरिया,
लेकिन नसीब में ही इनके नहीं है जरिया।
मातम करो हुसैनियो, कैसी मुसीबत आई।
आई अज़ान आई , आई अज़ान आई ।
]
मकतल में शौर बरपा,
कोई प्यास से है तडपा,
मासूम कोई प्यासा,
झूले से है पुकारा।
देखो किसीने उसको, सुखी ज़बा चटाई।
आई अज़ान आई , आई अज़ान आई ।
अल्लाह से दूर जाये तो होती है यजीदी,
पानी न जो पिलाए तो होती है यजीदी,
मासूमो को रुलाये तो होती है यजीदी,
माँ बहनों को सताए तो होती है यजीदी।
हुसैन बेगुनाही, यजीदियत गुनाही।
आई अज़ान आई , आई अज़ान आई ।
दुनिया को ये पता है,
हुसैन बेगुनाह है,
मैदाने कर्बला है,
और साथ में खुदा है।
जन्नत के दर पे इनको, क़र्बल की हवा लाई।
आई अज़ान आई , आई अज़ान आई ।
हिम्मत है होंसला है,
जज्बा है और वफ़ा है,
कोई कहता नैनवा है,
कोई कहता कर्बला है।
लश्कर है ७२ का, और साथ है वफाई।
आई अज़ान आई , आई अज़ान आई ।
हुसैन शहनशा की,
अब्बास बावफा की,
ये फ़ौज है अल्लाह की,
अली शेरे खुदा की।
वो खुद करेंगे इनकी, अब हौंसला अफजाई।
आई अज़ान आई , आई अज़ान आई ।
आयेंगी फ़ातेमा भी,
आयेंगे मुस्तफा भी,
चाहते है वों यहाँ भी,
चलती रहे अजा भी ।
रहे आखेरत तक बाक़ी, अल्लाह की दुहाई।
आई अज़ान आई , आई अज़ान आई ।
नोट- अज़ादारने हुसैन की नज़र है ये बेगुनाह हुसैन का पहला भाग। आगे और कितने पार्ट पेश होंगे अल्लाह ही बेहतर जनता है। इसलिए दुआ करे की सारी दुनिया का पानी स्याही बन जाये और में ताकयामत लिखता रहूँ- आमीन.
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