सोमवार, 17 मई 2010

baat bahut chotee se


बात बहुत छोटी सी


बहुत बख्शा है ज़िन्दगी में हमें, 
कुछ तो उसके लिए जमा कीजे. 
ज़िक्रे अल्लाह में ज़िन्दगी बीते, 
आप मेरे लिए दुआ कीजे . 


उसकी तस्बीह के तरीके है हज़ार, 
सिर्फ अल्ल्लाह अल्लाह नहीं किया कीजे. 
नेक आमालों का वो आशिक है,
दिल से फरमानों पर चला कीजे.


गर उससे लो लगनी है तुम्हे ,
सिर्फ पाकीज़ा ही रहा कीजे. 
उसने बख्शी है नमाज़ की दौलत,
आप पाबन्दी से अदा कीजे. 


ये जो दुनिया है एक कसोटी है, 
इस पर कुछ इस तरह चला कीजे. 
तुम मोहम्मद के हमक़दम होकर, 
बात कुरान की  सुना कीजे.


परखे जाओ जो रोज़े महशर तुम, 
खरे उतरों यही दुआ कीजे.
मेरा अल्लाह जिसमें  राजी हो, 
ऐसा जीने  का सिलसिला कीजे. 


हम्दो सना मेरी कुबूल हो जाए, 
हाथ उठाकर ये इल्तिजा कीजे. 
हम गुनाहगार तू बड़ा बख्शने वाला,
आजीजी  से यही कहा कीजे.


बात आरिफ की छोटी छोटी सी,
तुम बड़े गोर से सुना कीजे. 
इस में सब मसलहत है पोशीदा, 
हरगिज़ इसको न अनसुना कीजे.

बुधवार, 7 अप्रैल 2010

Quran se prerna


वारीजवानुम मिनल्लाहे अकबर .
अपने दिल पर लगालो ये मुहर. 
सबसे बड़ी नियामत है मुमिनो, 
अल्लाह की मर्जी ही हम पर.  


+++


हम आदमी को जानते है चेहरों के मुताबिक.
इज्ज़त भी बख्शते हैं हम ओहदों के मुताबिक. 

अल्लाह से बड़ा तो कोई नहीं होता,
यही सच है कुरान की आयातों के मुताबिक.



+++


जोहर का वक़्त है नमाज़ अदा करनी है.
फिर उसकी तरफ हमको निगाह करनी है.
जुमा का दिन है दुआ तो कुबूल होगी ही,
उसके करम की भी वह वाह वाह करनी है..




सोमवार, 29 मार्च 2010

चार पंक्ति विचार


चार पंक्ति विचार


वो मेरा खैर ख्वाह है; उसका हबीब में
फिर
भी ये कह रहे हो की हूँ ग़रीब में
कुछ बात है की आंसू मेरे सूखते नहीं है,
दरिया अता किया है जो उसने नसीब में



ये सच है पांच उंगली बराबर नहीं होती
लेकिन वो हाथ से भी तो बाहर नहीं होती
पैरों को बांध रखा हैं उसने भी हदों में,
सबके नसीब में तो चादर नहीं होती




चारो तरफ थपेड़ो में चलना, बड़ा मुश्किल होता हैं
तुफानो में दीपक का जलना, बड़ा मुश्किल होता हैं
उसके अपने ही जब उसकी लाठी तोड़ दें,
उसका गिरना फिर संभालना, बड़ा मुश्किल होता हैं

रविवार, 7 फ़रवरी 2010

मेरी दुआ " मादरे - वतन के नाम"




मेरी दुआ " मादरे - वतन के नाम "


ये दुआ है मेरी , ये दुआ है मेरी
सुन दुआएं मेरी , तू  दुआएं मेरी ।

राह चाहे तू कितनी भी मुश्किल बना,
पा सकूँ में तुझे वो ही मंजिल बना,
मेरी दुनिया का बस एक हासिल बना,
तू मुझे तेरी खिदमत के काबिल बना।

है भरोसा तू बिगड़ी बनाएं मेरी।
ये दुआ है मेरी, ये दुआ है मेरी।

जिस ज़मी पर तुझे रोज़ सजदा करूँ,
मरते दम तक उसी की में सेवा करूँ,
गोद में जिसके ताउम्र खेला करूँ ,
माँ का रुतबा उसी को में बख्शा करूँ।

लेती है रात दिन जो बलाएँ मेरी।
ये दुआ है मेरी, ये दुआ है मेरी।

बद नज़र उसकी जानिब में उठने न दूँ,
एक भी उसके दुश्मन को बचने न दूँ,
आस्स्तिनो के सांपो को डसने न दूँ,
रोकलू उसपे ओले बरसने न दूँ।

करदे मज़बूत इतनी भुजाएं मेरी।
ये दुआ है मेरी, ये दुआ है मेरी।

हो उजाला मेरी राह में ए खुदा,
इल्म का नूर पाऊं यही है दुआ,
तेरे फरमानों से पाकर में होंसला,
खुद भी मेह्कुं, बने ये  ज़मी खुशनुमा।

याद रखे ज़माना अदाएं मेरी।
ये दुआ है मेरी, ये दुआ है मेरी।

इस ज़मी पर जितने भी मोहताज है,
कोई सुनता नहीं जिनकी आवाज़ है,
हर घड़ी मुश्किलों की पड़े गाज है,
जानता हूँ तेरे हाथो में लाज हैं।

कर करम उनपे सुनके सदाएं मेरी।
ये दुआ है मेरी, ये दुआ है मेरी।

मुख्तलिफ भेष हैं, मुख्तलिफ हैं जुबा,
मुख्तलिफ हैं मज़हब, मुखतलिफ बस्तियां।
एक तहज़ीब हैं, एक है सबकी माँ।
सोन चिड़िया है यें जानता है जहाँ

जिस्मो जाँ इसके ही काम आयें मेरी
ये दुआ है मेरी, ये दुआ है मेरी।

झोली फैला के दर पर खड़ा मुस्तफा ,
कर दे पूरी मुरादें तू सुनले सदा,
तेरे कुरान से जो भी कुछ है सुना,
मेरे अल्लाह बनादें वही मेरी राह।

दायें बायें नज़र जा न पाएं मेरी।
ये दुआ है मेरी, ये दुआ है मेरी।










बुधवार, 30 दिसंबर 2009

सुन मेरी इल्तेजा !




सुन मेरी इतेजा !


कामयाबी की कोई राह दिखला तो दे

शुक्रिया करने का एक मौक़ा तो दे ।

में जो फिरता रहा हूँ यहाँ दर बदर

कोई सुनता नहीं कानो पर है बेहर

मुझको ज्यादा नहीं सिर्फ थोडा तो दे

शुक्रिया करने का एक मौका तो दे ।

तू है खालिक तेरे सब पर एहसान है

ये सुना है की तू बड़ा मेहरबान है

समंदर न सही एक कतरा तो दे

शुक्रिया करने का एक मौका तो दे ।

तेरे जाहो जलाली तो मशहूर है

तेरी रहमत बता हम से क्यों दूर हैं

गर खता है कोई तू आइना तो दे

शुक्रिया करने का एक मौका तो दे ।

ज़िन्दगी हो गयी करते करते दुआ

बीता बचपन जवानी अब में बुदा हुआ

लोट कर आ सकू इतनी दुनिया तो दे

शुक्रिया करने का एक मौका तो दे

ये सही है तेरे हाथो में दौर है

तेरी अंगुली पें नाचे हम तो वो मोर है

चल सके हम ज़रा इतना धागा तो दे

शुक्रिया करने का एक मौका तो दे ।

है यहाँ पर अँधेरा एक शमा भी नहीं

तेरे सूरज तक मेरा पहुचना भी नहीं

तितिमता दिया एक नन्हा तो दे

शुक्रिया करने का एक मौका तो दे ।


है ये दरिया तेरा तेरी ही नाउ है

ये ज़मी है तेरी तेरी ही छाव है

दे कही भी मगर तू आसरा तो दे

शुक्रिया करने का एक मौका तो दे ।

तू ज़माने को देता है किलकारियां

तेरी राह पर चले उनको दुश्वारियां

राज इतना सा आरिफ को समझा तो दे

शुक्रिया करने का एक मौका तो दे ।

दे रहा हु सदा सुन मेरी इल्तेजा

तू ने इंसा बनाया तेरा शुक्रिया

मेरे हाथो में भी एक झंडा तो दे

शुक्रिया करने का एक मौका तो दे ।


सोमवार, 28 दिसंबर 2009

बेगुनाह हुसैन



बेगुनाह हुसैन 


अकबर अज़ान देंगे , सुबह आशुरा की आई
आई अज़ान आई , आई अज़ान आई

सूरज निकल गया है,
दिन भी नया नया है,
आशूर का बयां है,
अल्लाह का शुक्रिया है।

मेरी कलम को बख्सी, उसने जो रोशनाई।
आई अज़ान आई , आई अज़ान आई

मैदाने कर्बला है,
खैमा लगा हुआ है,
कुम्बा यहाँ जमा है,
अल्लाह का आसरा है।

जेहरा के लाल को, नाना की याद आई।
आई अज़ान आई , आई अज़ान आई

पाकीज़ा सरज़मी है,
अल्लाह की हाजरी है,
शिकवा कोई नहीं है,
हर चेहरे पर खुशी है।

मंज़र कभी फिर ऐसा, देखोगे नहीं भाई।
आई अज़ान आई , आई अज़ान आई

इस्लाम का है परचम,
है सब में पूरा दम ख़म,
सबरो रजा भी बाहम,
देखेगा सारा आलम।

क्या क्या नसीब लेकर, देखे ये घड़ी आई।
आई अज़ान आई , आई अज़ान आई

प्यारे नबी के प्यारे,
जेहरा के भी दुलारे,
हैदर अली के तारे,
हाँ हाँ हुसैन हमारे।

आज हम हुसैन की भी, देखेंगे करिश्माई।
आई अज़ान आई , आई अज़ान आई

अकबर की वो जवानी,
मासूम की कहानी,
जैनब की वो बयानी,
वो बूंद बूंद पानी।

आँखों से टपकता है, जब आती है रुलाई।
आई अज़ान आई , आई अज़ान आई

उठो अज़दारो,
मातम के तरफ दारो,
अल्लाह के वफादारों,
इस जौर से पुकारो।

वो आसमा भी सोचे, कैसी ये सदा आई।
आई अज़ान आई , आई अज़ान आई

जब होती है विलादत,
बढती है दिल में चाहत,
पाकर नायाब दौलत,
मिलती है हमको राहत।


खुश होते यहाँ मरकर, सब बच्चे बूड़े भाई।
आई अज़ान आई , आई अज़ान आई

प्यारी इन्हें शहादत,
अल्लाह से है मोहब्बत,
पाने के लिए जन्नत,
अब मोल लेंगे आफत।

दांतों तले है अंगुली, देखी जो चतुराई।
आई अज़ान आई , आई अज़ान आई

मर कर अमर रंहेंगे,
सारे कहर सहेंगे,
चुपचाप ही रहेंगे,
मुंह से कुछ कहेंगे।

अल्लाह की मर्जी इनको, कैसी है रास आई।
आई अज़ान आई , आई अज़ान आई

प्यासे लबो को पानी मिलने के नहीं इम्काँ,
यहाँ प्यासे ही रहेंगे ये तीन दिन के महमा,
ऐसा नहीं यहाँ पर कोई नहीं है दरिया,
लेकिन नसीब में ही इनके नहीं है जरिया।

मातम करो हुसैनियो, कैसी मुसीबत आई।
आई अज़ान आई , आई अज़ान आई
]
मकतल में शौर बरपा,
कोई प्यास से है तडपा,
मासूम कोई प्यासा,
झूले से है पुकारा।

देखो किसीने उसको, सुखी ज़बा चटाई।
आई अज़ान आई , आई अज़ान आई

अल्लाह से दूर जाये तो होती है यजीदी,
पानी जो पिलाए तो होती है यजीदी,
मासूमो को रुलाये तो होती है यजीदी,
माँ बहनों को सताए तो होती है यजीदी।

हुसैन बेगुनाही, यजीदियत गुनाही।
आई अज़ान आई , आई अज़ान आई

दुनिया को ये पता है,
हुसैन बेगुनाह है,
मैदाने कर्बला है,
और साथ में खुदा है।

जन्नत के दर पे इनको, क़र्बल की हवा लाई।
आई अज़ान आई , आई अज़ान आई

हिम्मत है होंसला है,
जज्बा है और वफ़ा है,
कोई कहता नैनवा है,
कोई कहता कर्बला है।

लश्कर है ७२ का, और साथ है वफाई।
आई अज़ान आई , आई अज़ान आई

हुसैन शहनशा की,
अब्बास बावफा की,
ये फ़ौज है अल्लाह की,
अली शेरे खुदा की।

वो खुद करेंगे इनकी, अब हौंसला अफजाई।
आई अज़ान आई , आई अज़ान आई

आयेंगी फ़ातेमा भी,
आयेंगे मुस्तफा भी,
चाहते है वों यहाँ भी,
चलती रहे अजा भी

रहे आखेरत तक बाक़ी, अल्लाह की दुहाई।
आई अज़ान आई , आई अज़ान आई

नोट- अज़ादारने हुसैन की नज़र है ये बेगुनाह हुसैन का पहला भाग। आगे और कितने पार्ट पेश होंगे अल्लाह ही बेहतर जनता है। इसलिए दुआ करे की सारी दुनिया का पानी स्याही बन जाये और में ताकयामत लिखता रहूँ- आमीन.